🚩 श्री हनुमान चालीसा — सरल हिंदी अर्थ
🙏 श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर धाम
॥ प्रारंभिक दोहा ॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
सरल अर्थ:
गुरुदेव के चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को शुद्ध करके मैं भगवान श्री राम के पवित्र यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चार पुरुषार्थों को प्रदान करने वाला है।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
सरल अर्थ:
हे पवनपुत्र हनुमान जी! मैं स्वयं को अल्पबुद्धि वाला जानकर आपका स्मरण करता हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें तथा मेरे दुखों और मन के विकारों को दूर करें।
🌺 चौपाइयों का सरल अर्थ
1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
अर्थ:
हे हनुमान जी! आप ज्ञान और गुणों के अथाह सागर हैं। वानरों में श्रेष्ठ हैं और तीनों लोकों में आपकी कीर्ति प्रकाशित है।
2. राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
अर्थ:
आप भगवान श्री राम के दूत और अपार शक्ति के धाम हैं। आप माता अंजनी के पुत्र और पवनदेव के पुत्र कहलाते हैं।
3. महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
अर्थ:
आप महान वीर और अत्यंत शक्तिशाली हैं। आप बुरे विचारों को दूर करके अच्छे विचारों की प्रेरणा देते हैं।
4. कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥
अर्थ:
आपका शरीर स्वर्ण के समान चमकदार है। आपके कानों में कुंडल और सिर पर घुंघराले बाल सुशोभित हैं।
5. हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
अर्थ:
आपके हाथ में वज्र और ध्वजा सुशोभित हैं तथा कंधे पर जनेऊ धारण किया हुआ है।
6. शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥
अर्थ:
आप भगवान शिव के अंश तथा केसरी नंदन हैं। आपके तेज और पराक्रम की पूरी दुनिया वंदना करती है।
7. विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
अर्थ:
आप विद्वान, गुणवान और अत्यंत बुद्धिमान हैं। आप भगवान श्री राम के कार्य को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
8. प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
अर्थ:
आपको भगवान श्री राम की कथाएँ सुनना बहुत प्रिय है। श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण आपके हृदय में निवास करते हैं।
9. सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
अर्थ:
आपने माता सीता के सामने अपना छोटा और सरल रूप धारण किया तथा लंका में अपना विशाल और भयंकर रूप दिखाकर लंका को जला दिया।
10. भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥
अर्थ:
आपने विशाल रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और भगवान श्री राम के कार्यों को पूरा किया।
11. लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥
अर्थ:
आप संजीवनी बूटी लेकर आए, जिससे लक्ष्मण जी के प्राण बच गए। यह देखकर भगवान श्री राम अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने आपको हृदय से लगा लिया।
12. रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
अर्थ:
भगवान श्री राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे मेरे भाई भरत के समान प्रिय हो।
13. सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
अर्थ:
भगवान श्री राम ने कहा कि हजार मुखों वाले शेषनाग भी आपके यश का पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते। ऐसा कहकर उन्होंने आपको गले लगा लिया।
14. सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥
अर्थ:
सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा जी, नारद जी, सरस्वती जी और शेषनाग जैसे महान देवता और ऋषि भी आपकी महिमा का वर्णन करते हैं।
15. जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥
अर्थ:
यमराज, कुबेर, दिशाओं के रक्षक और बड़े-बड़े विद्वान कवि भी आपकी महिमा का पूरा वर्णन नहीं कर सकते।
16. तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
अर्थ:
आपने सुग्रीव की सहायता की और उनकी भगवान श्री राम से मित्रता कराई। इसके परिणामस्वरूप उन्हें उनका राज्य वापस प्राप्त हुआ।
17. तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
अर्थ:
विभीषण ने आपकी सलाह को माना और आगे चलकर लंका के राजा बने।
18. जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
अर्थ:
सूर्य बहुत दूर स्थित था, लेकिन बाल रूप में आपने उसे मीठा फल समझकर निगलने के लिए उसकी ओर छलांग लगा दी।
19. प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥
अर्थ:
भगवान श्री राम की अंगूठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को पार कर लिया। आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।
20. दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
अर्थ:
दुनिया में जितने भी कठिन कार्य हैं, आपकी कृपा और आशीर्वाद से वे सरल हो सकते हैं।
21. राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
अर्थ:
आप भगवान श्री राम के द्वार के रक्षक हैं। आपकी अनुमति के बिना वहाँ प्रवेश संभव नहीं है।
22. सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥
अर्थ:
जो आपकी शरण में आता है उसे सुख और सुरक्षा का अनुभव होता है। जब आप रक्षक हों तो डरने की आवश्यकता नहीं रहती।
23. आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
अर्थ:
आप अपने अपार तेज और शक्ति को स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं। आपकी गर्जना से तीनों लोकों में आपका प्रभाव दिखाई देता है।
24. भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥
अर्थ:
धार्मिक विश्वास के अनुसार, जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम और स्मरण होता है वहाँ नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं।
25. नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
अर्थ:
हनुमान जी के निरंतर स्मरण और भक्ति से मनुष्य को दुख और पीड़ा सहने की शक्ति तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
26. संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
अर्थ:
जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे कठिन समय में साहस और संकट का सामना करने की शक्ति मिलती है।
27. सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥
अर्थ:
भगवान श्री राम सभी के श्रेष्ठ और धर्म के आदर्श राजा हैं। उनके सभी कार्यों को पूरा करने में आपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
28. और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
अर्थ:
जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी की आराधना करता है, उसे अपने अच्छे उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रेरणा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
29. चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
अर्थ:
चारों युगों में हनुमान जी का यश और पराक्रम प्रसिद्ध है तथा संसार में उनकी महिमा का प्रकाश फैला हुआ है।
30. साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
अर्थ:
आप साधु-संतों की रक्षा करते हैं, दुष्ट शक्तियों का विनाश करते हैं और भगवान श्री राम को अत्यंत प्रिय हैं।
31. अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
अर्थ:
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता ने आपको आठ सिद्धियाँ और नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान करने का आशीर्वाद दिया।
32. राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
अर्थ:
आपके पास भगवान श्री राम की भक्ति रूपी अमृत है और आप सदैव श्री राम के सेवक बने रहना चाहते हैं।
33. तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अर्थ:
हनुमान जी की भक्ति करने से भगवान श्री राम की भक्ति प्राप्त होती है और मनुष्य अपने दुखों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक शांति की ओर बढ़ता है।
34. अंतकाल रघुवर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
अर्थ:
भक्त की अंतिम अवस्था में भगवान श्री राम के धाम की प्राप्ति और आगे भी भगवान की भक्ति में जीवन बिताने की कामना व्यक्त की गई है।
35. और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥
अर्थ:
जो व्यक्ति हनुमान जी की अनन्य भक्ति करता है, उसका मन एकाग्र होता है और उसे आध्यात्मिक सुख एवं संतोष प्राप्त होता है।
36. संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अर्थ:
जो भक्त बलवान और वीर हनुमान जी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है, उसे कठिनाइयों का सामना करने का साहस मिलता है।
37. जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
अर्थ:
हे हनुमान जी! आपकी जय हो। आप गुरु के समान कृपा करके अपने भक्तों का मार्गदर्शन करें।
38. जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥
अर्थ:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसे संकटों और बंधनों से मुक्ति तथा मन की शांति प्राप्त होती है।
39. जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
अर्थ:
जो भक्त श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसे आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। भगवान शिव स्वयं इसके साक्षी माने गए हैं।
40. तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
अर्थ:
गोस्वामी तुलसीदास जी स्वयं को भगवान का सेवक बताते हुए हनुमान जी से प्रार्थना करते हैं कि वे सदैव उनके हृदय में निवास करें।
🌺 अंतिम दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
🙏 सरल अर्थ:
हे पवनपुत्र हनुमान जी! आप संकटों को दूर करने वाले और मंगलमय स्वरूप हैं। हे देवताओं में श्रेष्ठ! भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ मेरे हृदय में निवास करें।
🚩 हनुमान चालीसा का संदेश
हनुमान चालीसा हमें भक्ति, साहस, सेवा, विनम्रता, बुद्धि और भगवान के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती है।
श्री हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और परोपकार के लिए करना चाहिए।
🙏 श्रद्धा रखें • अच्छे कर्म करें • सेवा करें
🚩 जय श्री राम 🚩
🚩 जय बजरंगबली 🚩
🔱 श्री पंचमुखी हनुमान जी महाराज की जय 🔱